Thu. Nov 21st, 2019

 

जिले भर मे चल रहा है खुलेआम अबैध खनन

भारी पोकलैंड मशीन से किया जा रहा है अवैध खनन

चुनावी माहौल में खनन माफिया बेलगाम

बाँदा से भगत सिंह की खास रिपोर्ट

 बाँदा ,:-एक ओर चुनावी माहौल है तो दूसरी ओर बालू माफिया इस माहौल का फायदा उठा कर अनियंत्रित हो गए हैं। बाँदा में खुलेआम अवैध खनन का खुला खेल हो रहा है। तो दूसरी ओर आम जनमानस बूँद बूँद पानी के लिए तरस रहा है। दर्जन भर मुहल्लों में अभी से पानी की सप्लाई ठप हो चुकी है। बाँदा की जीवन दायनी केन नदी का इस तरह दोहन किया गया है, कि अभी से पानी के लिए हाहाकार मच गया है।अफसरशाही, नेता और खनन माफियाओं की साठ गांठ का यह भयावह परिणाम अब जनता भुगत रही है ।

 चुनावी माहौल चरम पर हैं। नेता भाषणों में मस्त हैं और प्रशासन चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त है। बड़ी बात यह है कि प्रकति, किसान और जल संकट से जुड़ा सबसे बड़ा अवैध खनन का मुद्दा पूरी तरह से नदारद है। पक्ष और विपक्ष सभी नेता अवैध खनन के मुद्दे पर मौन हैं। जिससे पता चलता है कि सबकी कहीं न कहीं अवैध खनन के खेल में भागीदारी है।

– बाँदा के करीब दो दर्जन मुहल्लों में अभी से पानी आना बंद हो चुका है। लोग बूँद बूँद पानी के लिए तरस रहे है। सुबह से लोग बाल्टियां व डब्बे लेकर पानी का इंतेजार करते हैं। कहीं एक हफ्ते तो कहीं दस दिन से नलों में पानी नहीं आया है। मजबूरी में लोंगो को दूर जाकर हैण्डपम्प व कुओं से पानी भरना पड़ता है। जब अप्रैल में ए हाल है तो मई और जून में क्या होगा। सूखे बुंदेलखंड में जल त्रासदी का यह आलम और भी भयावह हो सकता है।

– दर असल बाँदा शहर से सटी केन नदी से शहर में पीने का पानी आता है। पर केन नदी के हालात आपके सामने हैं। यह नजारा है शहर से सटी *दुरेडी और दुरेडी-4* खदान का, जहाँ बाकायदा दिन के उजाले में 9 पोकलैंड लगाकर अवैध खनन किया जा रहा है। हालांकि यह तस्वीर जिले की लगभग सभी खदानों की है। अवैध खनन की वजह से केन नदी की जल धारा परिवर्तित हो गयी है। और केन नदी का पानी जल संस्थान के पंप तक नहीं पहुँच पा रहा है। बाँदा जनपद की एक मात्र जीवन दायनी केन नदी को बालू माफियाओ ने तबाह कर दिया है। जगह जगह जल धारा रोक कर भारी भरकम मशीनों से अवैध खनन किया जा रहा है। और इस पूरे खेल में प्रशासन व माननीयों की पूरी पूरी मिलीभगत साफ देखी जा सकती है। एक ओर बुंदेलखंड की खनिज संपदा खुलेआम लूटी जा रही है तो दूसरी ओर नदियों के प्राकृतिक स्वरूप से की गई छेड़छाड़ ने जल संकट जैसा भयानक रूप ले लिया है। अवैध खनन और जल संकट यहाँ की प्रमुख समस्या है फिर भी राजनीतिक गलियारे से ए मुद्दा गायब है। नौकरशाही से लेकर लखनऊ और दिल्ली में बैठे इनके आक़ा अपनी तिजोरिया भर रहे हैं। मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, कलकत्ता और उत्तर प्रदेश के खनन माफिया यहाँ लाल सोने की लूट कर रहे हैं। पर फिर वही सवाल खड़ा होता है कि इन पर लगाम लगाए तो कौन लगाए। चांदी के जूते के आगे सब नतमस्तक हैं।

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